Book 1 • Chapter 97
Section 97
8 verses
Verse 1
नारद कर मैं काह बिगारा भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा
Verse 2
अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा बौरे बरहि लगि तपु कीन्हा
Verse 3
साचेहुँ उन्ह के मोह न माया उदासीन धनु धामु न जाया
Verse 4
पर घर घालक लाज न भीरा बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा
Verse 5
जननिहि बिकल बिलोकि भवानी बोली जुत बिबेक मृदु बानी
Verse 6
अस बिचारि सोचहि मति माता सो न टरइ जो रचइ बिधाता
Verse 7
करम लिखा जौ बाउर नाहू तौ कत दोसु लगाइअ काहू
Verse 8
तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका
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