Book 1 • Chapter 96
Section 96
14 verses
Verse 1
लै अगवान बरातहि आए दिए सबहि जनवास सुहाए
Verse 2
मैनाँ सुभ आरती सँवारी संग सुमंगल गावहिं नारी
Verse 3
कंचन थार सोह बर पानी परिछन चली हरहि हरषानी
Verse 4
बिकट बेष रुद्रहि जब देखा अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा
Verse 5
भागि भवन पैठीं अति त्रासा गए महेसु जहाँ जनवासा
Verse 6
मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी
Verse 7
अधिक सनेहँ गोद बैठारी स्याम सरोज नयन भरे बारी
Verse 8
जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा
Verse 9
कस कीन्ह बरु बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई
Verse 10
जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहिं लागई
Verse 11
तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं
Verse 12
घरु जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं
Verse 13
भई बिकल अबला सकल दुखित देखि गिरिनारि
Verse 14
करि बिलापु रोदति बदति सुता सनेहु सँभारि
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