Book 1 • Chapter 95
Section 95
8 verses
Verse 1
नगर निकट बरात सुनि आई पुर खरभरु सोभा अधिकाई
Verse 2
करि बनाव सजि बाहन नाना चले लेन सादर अगवाना
Verse 3
हियँ हरषे सुर सेन निहारी हरिहि देखि अति भए सुखारी
Verse 4
सिव समाज जब देखन लागे बिडरि चले बाहन सब भागे
Verse 5
धरि धीरजु तहँ रहे सयाने बालक सब लै जीव पराने
Verse 6
गएँ भवन पूछहिं पितु माता कहहिं बचन भय कंपित गाता
Verse 7
कहिअ काह कहि जाइ न बाता जम कर धार किधौं बरिआता
Verse 8
बरु बौराह बसहँ असवारा ब्याल कपाल बिभूषन छारा
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