Book 1 • Chapter 94
Section 94
8 verses
Verse 1
जस दूलहु तसि बनी बराता कौतुक बिबिध होहिं मग जाता
Verse 2
इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना
Verse 3
सैल सकल जहँ लगि जग माहीं लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं
Verse 4
बन सागर सब नदीं तलावा हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा
Verse 5
कामरूप सुंदर तन धारी सहित समाज सहित बर नारी
Verse 6
गए सकल तुहिनाचल गेहा गावहिं मंगल सहित सनेहा
Verse 7
प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए
Verse 8
पुर सोभा अवलोकि सुहाई लागइ लघु बिरंचि निपुनाई
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