Book 4 • Chapter 1
Section 1
12 verses
Verse 1
आगें चले बहुरि रघुराया रिष्यमूक परवत निअराया
Verse 2
तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा आवत देखि अतुल बल सींवा
Verse 3
अति सभीत कह सुनु हनुमाना पुरुष जुगल बल रूप निधाना
Verse 4
धरि बटु रूप देखु तैं जाई कहेसु जानि जियँ सयन बुझाई
Verse 5
पठए बालि होहिं मन मैला भागौं तुरत तजौं यह सैला
Verse 6
बिप्र रूप धरि कपि तहँ गयऊ माथ नाइ पूछत अस भयऊ
Verse 7
को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा छत्री रूप फिरहु बन बीरा
Verse 8
कठिन भूमि कोमल पद गामी कवन हेतु बिचरहु बन स्वामी
Verse 9
मृदुल मनोहर सुंदर गाता सहत दुसह बन आतप बाता
Verse 10
की तुम्ह तीनि देव महँ कोऊ नर नारायन की तुम्ह दोऊ
Verse 11
जग कारन तारन भव भंजन धरनी भार
Verse 12
की तुम्ह अकिल भुवन पति लीन्ह मनुज अवतार
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