Book 4 • Chapter 10
Section 10
5 verses
Verse 1
सुनत राम अति कोमल बानी बालि सीस परसेउ निज पानी
Verse 2
अचल करौं तनु राखहु प्राना बालि कहा सुनु कृपानिधाना
Verse 3
जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं अंत राम कहि आवत नाहीं
Verse 4
जासु नाम बल संकर कासी देत सबहि सम गति अविनासी
Verse 5
मम लोचन गोचर सोइ आवा बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा
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