Book 4 • Chapter 9
Section 9
12 verses
Verse 1
परा बिकल महि सर के लागें पुनि उठि बैठ देखि प्रभु आगें
Verse 2
स्याम गात सिर जटा बनाएँ अरुन नयन सर चाप चढ़ाएँ
Verse 3
पुनि पुनि चितइ चरन चित दीन्हा सुफल जन्म माना प्रभु चीन्हा
Verse 4
हृदयँ प्रीति मुख बचन कठोरा बोला चितइ राम की ओरा
Verse 5
धर्म हेतु अवतरेहु गोसाई मारेहु मोहि ब्याध की नाई
Verse 6
मैं बैरी सुग्रीव पिआरा अवगुन कबन नाथ मोहि मारा
Verse 7
अनुज बधू भगिनी सुत नारी सुनु सठ कन्या सम ए चारी
Verse 8
इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई ताहि बधें कछु पाप न होई
Verse 9
मुढ़ तोहि अतिसय अभिमाना नारि सिखावन करसि न काना
Verse 10
मम भुज बल आश्रित तेहि जानी मारा चहसि अधम अभिमानी
Verse 11
सुनहु राम स्वामी सन चल न चातुरी मोरि
Verse 12
प्रभु अजहूँ मैं पापी अंतकाल गति तोरि
0:000:00
Speed: