Book 6 • Chapter 108
Section 108
14 verses
Verse 1
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता देखौं नयन स्याम मृदु गाता
Verse 2
तब हनुमान राम पहिं जाई जनकसुता कै कुसल सुनाई
Verse 3
सुनि संदेसु भानुकुलभूषन बोलि लिए जुबराज बिभीषन
Verse 4
मारुतसुत के संग सिधावहु सादर जनकसुतहि लै आवहु
Verse 5
तुरतहिं सकल गए जहँ सीता सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता
Verse 6
बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो
Verse 7
बहु प्रकार भूषन पहिराए सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए
Verse 8
ता पर हरषि चढ़ी बैदेही सुमिरि राम सुखधाम सनेही
Verse 9
बेतपानि रच्छक चहुँ पासा चले सकल मन परम हुलासा
Verse 10
देखन भालु कीस सब आए रच्छक कोपि निवारन धाए
Verse 11
कह रघुबीर कहा मम मानहु सीतहि सखा पयादें आनहु
Verse 12
देखहुँ कपि जननी की नाईं बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई
Verse 13
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे
Verse 14
सीता प्रथम अनल महुँ राखी प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी
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