Book 6 • Chapter 107
Section 107
8 verses
Verse 1
पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना लंका जाहु कहेउ भगवाना
Verse 2
समाचार जानकिहि सुनावहु तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु
Verse 3
तब हनुमंत नगर महुँ आए सुनि निसिचरी निसाचर धाए
Verse 4
बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही
Verse 5
दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा रघुपति दूत जानकीं चीन्हा
Verse 6
कहहु तात प्रभु कृपानिकेता कुसल अनुज कपि सेन समेता
Verse 7
सब बिधि कुसल कोसलाधीसा मातु समर जीत्यो दससीसा
Verse 8
अबिचल राजु बिभीषन पायो सुनि कपि बचन हरष उर छायो
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