Book 6 • Chapter 119
Section 119
15 verses
Verse 1
अतिसय प्रीति देख रघुराई लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई
Verse 2
मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो उत्तर दिसिहि बिमान चलायो
Verse 3
चलत बिमान कोलाहल होई जय रघुबीर कहइ सबु कोई
Verse 4
सिंहासन अति उच्च मनोहर श्री समेत प्रभु बैठै ता पर
Verse 5
राजत रामु सहित भामिनी मेरु सृंग जनु घन दामिनी
Verse 6
रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर
Verse 7
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी सागर सर सरि निर्मल बारी
Verse 8
सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा
Verse 9
कह रघुबीर देखु रन सीता लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता
Verse 10
हनूमान अंगद के मारे रन महि परे निसाचर भारे
Verse 11
कुंभकरन रावन द्वौ भाई इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई
Verse 12
इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम
Verse 13
सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम 119(क)
Verse 14
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम
Verse 15
सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम 119(ख)
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