Book 6 • Chapter 13
Section 13
12 verses
Verse 1
देखु बिभीषन दच्छिन आसा घन घंमड दामिनि बिलासा
Verse 2
मधुर मधुर गरजइ घन घोरा होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा
Verse 3
कहत बिभीषन सुनहु कृपाला होइ न तड़ित न बारिद माला
Verse 4
लंका सिखर उपर आगारा तहँ दसकंघर देख अखारा
Verse 5
छत्र मेघडंबर सिर धारी सोइ जनु जलद घटा अति कारी
Verse 6
मंदोदरी श्रवन ताटंका सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका
Verse 7
बाजहिं ताल मृदंग अनूपा सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा
Verse 8
प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना चाप चढ़ाइ बान संधाना
Verse 9
छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान
Verse 10
सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान 13(क)
Verse 11
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग
Verse 12
रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग 13(ख)
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