Book 6 • Chapter 16
Section 16
12 verses
Verse 1
बिहँसा नारि बचन सुनि काना अहो मोह महिमा बलवाना
Verse 2
नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं अवगुन आठ सदा उर रहहीं
Verse 3
साहस अनृत चपलता माया भय अबिबेक असौच अदाया
Verse 4
रिपु कर रुप सकल तैं गावा अति बिसाल भय मोहि सुनावा
Verse 5
सो सब प्रिया सहज बस मोरें समुझि परा प्रसाद अब तोरें
Verse 6
जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई
Verse 7
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि समुझत सुखद सुनत भय मोचनि
Verse 8
मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ
Verse 9
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध
Verse 10
सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध 16(क)
Verse 11
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद
Verse 12
मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम 16(ख)
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