Book 6 • Chapter 17
Section 17
12 verses
Verse 1
इहाँ प्रात जागे रघुराई पूछा मत सब सचिव बोलाई
Verse 2
कहहु बेगि का करिअ उपाई जामवंत कह पद सिरु नाई
Verse 3
सुनु सर्बग्य सकल उर बासी बुधि बल तेज धर्म गुन रासी
Verse 4
मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा दूत पठाइअ बालिकुमारा
Verse 5
नीक मंत्र सब के मन माना अंगद सन कह कृपानिधाना
Verse 6
बालितनय बुधि बल गुन धामा लंका जाहु तात मम कामा
Verse 7
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ परम चतुर मैं जानत अहऊँ
Verse 8
काजु हमार तासु हित होई रिपु सन करेहु बतकही सोई
Verse 9
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ
Verse 10
सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु 17(क)
Verse 11
स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ
Verse 12
अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ 17(ख)
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