Book 6 • Chapter 18
Section 18
12 verses
Verse 1
बंदि चरन उर धरि प्रभुताई अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई
Verse 2
प्रभु प्रताप उर सहज असंका रन बाँकुरा बालिसुत बंका
Verse 3
पुर पैठत रावन कर बेटा खेलत रहा सो होइ गै भैंटा
Verse 4
बातहिं बात करष बढ़ि आई जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई
Verse 5
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई
Verse 6
निसिचर निकर देखि भट भारी जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी
Verse 7
एक एक सन मरमु न कहहीं समुझि तासु बध चुप करि रहहीं
Verse 8
भयउ कोलाहल नगर मझारी आवा कपि लंका जेहीं जारी
Verse 9
अब धौं कहा करिहि करतारा अति सभीत सब करहिं बिचारा
Verse 10
बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई
Verse 11
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज
Verse 12
सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज
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