Book 6 • Chapter 30
Section 30
10 verses
Verse 1
अब जनि बतबढ़ाव खल करही सुनु मम बचन मान परिहरही
Verse 2
दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ अस बिचारि रघुबीर पठायउँ
Verse 3
बार बार अस कहइ कृपाला नहिं गजारि जसु बधें सृकाला
Verse 4
मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे
Verse 5
नाहिं त करि मुख भंजन तोरा लै जातेउँ सीतहि बरजोरा
Verse 6
जानेउँ तव बल अधम सुरारी सूनें हरि आनिहि परनारी
Verse 7
तैं निसिचर पति गर्ब बहूता मैं रघुपति सेवक कर दूता
Verse 8
जौं न राम अपमानहि डरउँ तोहि देखत अस कौतुक करऊँ
Verse 9
तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ
Verse 10
तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ
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