Book 6 • Chapter 29
Section 29
12 verses
Verse 1
जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला बिधि के लिखे अंक निज भाला
Verse 2
नर कें कर आपन बध बाँची हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची
Verse 3
सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें
Verse 4
आन बीर बल सठ मम आगें पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे
Verse 5
कह अंगद सलज्ज जग माहीं रावन तोहि समान कोउ नाहीं
Verse 6
लाजवंत तव सहज सुभाऊ निज मुख निज गुन कहसि न काऊ
Verse 7
सिर अरु सैल कथा चित रही ताते बार बीस तैं कही
Verse 8
सो भुजबल राखेउ उर घाली जीतेहु सहसबाहु बलि बाली
Verse 9
सुनु मतिमंद देहि अब पूरा काटें सीस कि होइअ सूरा
Verse 10
इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा काटइ निज कर सकल सरीरा
Verse 11
जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद
Verse 12
ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद
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