Book 6 • Chapter 28
Section 28
10 verses
Verse 1
सठ साखामृग जोरि सहाई बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई
Verse 2
नाघहिं खग अनेक बारीसा सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा
Verse 3
मम भुज सागर बल जल पूरा जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा
Verse 4
बीस पयोधि अगाध अपारा को अस बीर जो पाइहि पारा
Verse 5
दिगपालन्ह मैं नीर भरावा भूप सुजस खल मोहि सुनावा
Verse 6
जौं पै समर सुभट तव नाथा पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा
Verse 7
तौ बसीठ पठवत केहि काजा रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा
Verse 8
हरगिरि मथन निरखु मम बाहू पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू
Verse 9
सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस
Verse 10
हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस
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