Book 6 • Chapter 38
Section 38
14 verses
Verse 1
नारि बचन सुनि बिसिख समाना सभाँ गयउ उठि होत बिहाना
Verse 2
बैठ जाइ सिंघासन फूली अति अभिमान त्रास सब भूली
Verse 3
इहाँ राम अंगदहि बोलावा आइ चरन पंकज सिरु नावा
Verse 4
अति आदर सपीप बैठारी बोले बिहँसि कृपाल खरारी
Verse 5
बालितनय कौतुक अति मोही तात सत्य कहु पूछउँ तोही
Verse 6
रावनु जातुधान कुल टीका भुज बल अतुल जासु जग लीका
Verse 7
तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए कहहु तात कवनी बिधि पाए
Verse 8
सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी मुकुट न होहिं भूप गुन चारी
Verse 9
साम दान अरु दंड बिभेदा नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा
Verse 10
नीति धर्म के चरन सुहाए अस जियँ जानि नाथ पहिं आए
Verse 11
धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस
Verse 12
तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस 38(((क)
Verse 13
परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार
Verse 14
समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार 38(ख)
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