Book 6 • Chapter 37
Section 37
10 verses
Verse 1
जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला उतरे प्रभु दल सहित सुबेला
Verse 2
कारुनीक दिनकर कुल केतू दूत पठायउ तव हित हेतू
Verse 3
सभा माझ जेहिं तव बल मथा करि बरूथ महुँ मृगपति जथा
Verse 4
अंगद हनुमत अनुचर जाके रन बाँकुरे बीर अति बाँके
Verse 5
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू मुधा मान ममता मद बहहू
Verse 6
अहह कंत कृत राम बिरोधा काल बिबस मन उपज न बोधा
Verse 7
काल दंड गहि काहु न मारा हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा
Verse 8
निकट काल जेहि आवत साईं तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं
Verse 9
दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु
Verse 10
कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु
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