Book 6 • Chapter 40
Section 40
12 verses
Verse 1
लंकाँ भयउ कोलाहल भारी सुना दसानन अति अहँकारी
Verse 2
देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई बिहँसि निसाचर सेन बोलाई
Verse 3
आए कीस काल के प्रेरे छुधावंत सब निसिचर मेरे
Verse 4
अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा
Verse 5
सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू धरि धरि भालु कीस सब खाहू
Verse 6
उमा रावनहि अस अभिमाना जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना
Verse 7
चले निसाचर आयसु मागी गहि कर भिंडिपाल बर साँगी
Verse 8
तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा सुल कृपान परिघ गिरिखंडा
Verse 9
जिमि अरुनोपल निकर निहारी धावहिं सठ खग मांस अहारी
Verse 10
चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा तिमि धाए मनुजाद अबूझा
Verse 11
नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर
Verse 12
कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर
0:000:00
Speed: