Book 6 • Chapter 41
Section 41
8 verses
Verse 1
कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे
Verse 2
बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ
Verse 3
बाजहिं भेरि नफीरि अपारा सुनि कादर उर जाहिं दरारा
Verse 4
देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा
Verse 5
धावहिं गनहिं न अवघट घाटा पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा
Verse 6
कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं
Verse 7
उत रावन इत राम दोहाई जयति जयति जय परी लराई
Verse 8
निसिचर सिखर समूह ढहावहिं कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं
0:000:00
Speed: