Book 6 • Chapter 42
Section 42
12 verses
Verse 1
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा
Verse 2
चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर जय रघुबीर प्रताप दिवाकर
Verse 3
चले निसाचर निकर पराई प्रबल पवन जिमि घन समुदाई
Verse 4
हाहाकार भयउ पुर भारी रोवहिं बालक आतुर नारी
Verse 5
सब मिलि देहिं रावनहि गारी राज करत एहिं मृत्यु हँकारी
Verse 6
निज दल बिचल सुनी तेहिं काना फेरि सुभट लंकेस रिसाना
Verse 7
जो रन बिमुख सुना मैं काना सो मैं हतब कराल कृपाना
Verse 8
सर्बसु खाइ भोग करि नाना समर भूमि भए बल्लभ प्राना
Verse 9
उग्र बचन सुनि सकल डेराने चले क्रोध करि सुभट लजाने
Verse 10
सन्मुख मरन बीर कै सोभा तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा
Verse 11
बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि
Verse 12
ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी
0:000:00
Speed: