Book 6 • Chapter 53
Section 53
10 verses
Verse 1
छतज नयन उर बाहु बिसाला हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला
Verse 2
इहाँ दसानन सुभट पठाए नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए
Verse 3
भूधर नख बिटपायुध धारी धाए कपि जय राम पुकारी
Verse 4
भिरे सकल जोरिहि सन जोरी इत उत जय इच्छा नहिं थोरी
Verse 5
मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं
Verse 6
मारु मारु धरु धरु धरु मारू सीस तोरि गहि भुजा उपारू
Verse 7
असि रव पूरि रही नव खंडा धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा
Verse 8
देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा
Verse 9
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ
Verse 10
जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ
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