Book 6 • Chapter 58
Section 58
10 verses
Verse 1
कपि तव दरस भइउँ निष्पापा मिटा तात मुनिबर कर सापा
Verse 2
मुनि न होइ यह निसिचर घोरा मानहु सत्य बचन कपि मोरा
Verse 3
अस कहि गई अपछरा जबहीं निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं
Verse 4
कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू
Verse 5
सिर लंगूर लपेटि पछारा निज तनु प्रगटेसि मरती बारा
Verse 6
राम राम कहि छाड़ेसि प्राना सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना
Verse 7
देखा सैल न औषध चीन्हा सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा
Verse 8
गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ अवधपुरी उपर कपि गयऊ
Verse 9
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि
Verse 10
बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि
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