Book 6 • Chapter 76
Section 76
18 verses
Verse 1
जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा आहुति देत रुधिर अरु भैंसा
Verse 2
कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा
Verse 3
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई लातन्हि हति हति चले पराई
Verse 4
लै त्रिसुल धावा कपि भागे आए जहँ रामानुज आगे
Verse 5
आवा परम क्रोध कर मारा गर्ज घोर रव बारहिं बारा
Verse 6
कोपि मरुतसुत अंगद धाए हति त्रिसूल उर धरनि गिराए
Verse 7
प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा सर हति कृत अनंत जुग खंडा
Verse 8
उठि बहोरि मारुति जुबराजा हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा
Verse 9
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा तब धावा करि घोर चिकारा
Verse 10
आवत देखि क्रुद्ध जनु काला लछिमन छाड़े बिसिख कराला
Verse 11
देखेसि आवत पबि सम बाना तुरत भयउ खल अंतरधाना
Verse 12
बिबिध बेष धरि करइ लराई कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई
Verse 13
देखि अजय रिपु डरपे कीसा परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा
Verse 14
लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा
Verse 15
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा सर संधान कीन्ह करि दापा
Verse 16
छाड़ा बान माझ उर लागा मरती बार कपटु सब त्यागा
Verse 17
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान
Verse 18
धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान
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