Book 6 • Chapter 75
Section 75
16 verses
Verse 1
मेघनाद के मुरछा जागी पितहि बिलोकि लाज अति लागी
Verse 2
तुरत गयउ गिरिबर कंदरा करौं अजय मख अस मन धरा
Verse 3
इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा सुनहु नाथ बल अतुल उदारा
Verse 4
मेघनाद मख करइ अपावन खल मायावी देव सतावन
Verse 5
जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि
Verse 6
सुनि रघुपति अतिसय सुख माना बोले अंगदादि कपि नाना
Verse 7
लछिमन संग जाहु सब भाई करहु बिधंस जग्य कर जाई
Verse 8
तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही देखि सभय सुर दुख अति मोही
Verse 9
मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई
Verse 10
जामवंत सुग्रीव बिभीषन सेन समेत रहेहु तीनिउ जन
Verse 11
जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन कटि निषंग कसि साजि सरासन
Verse 12
प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा बोले घन इव गिरा गँभीरा
Verse 13
जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं तौ रघुपति सेवक न कहावौं
Verse 14
जौं सत संकर करहिं सहाई तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई
Verse 15
रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत
Verse 16
अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत
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