Book 6 • Chapter 74
Section 74
14 verses
Verse 1
चरित राम के सगुन भवानी तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी
Verse 2
अस बिचारि जे तग्य बिरागी रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी
Verse 3
ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा
Verse 4
जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा
Verse 5
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही लागेसि अधम पचारै मोही
Verse 6
अस कहि तरल त्रिसूल चलायो जामवंत कर गहि सोइ धायो
Verse 7
मारिसि मेघनाद कै छाती परा भूमि घुर्मित सुरघाती
Verse 8
पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ महि पछारि निज बल देखरायो
Verse 9
बर प्रसाद सो मरइ न मारा तब गहि पद लंका पर डारा
Verse 10
इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो राम समीप सपदि सो आयो
Verse 11
खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ
Verse 12
माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ 74(क)
Verse 13
गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ
Verse 14
चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ 74(ख)
0:000:00
Speed: