Book 6 • Chapter 73
Section 73
15 verses
Verse 1
सक्ति सूल तरवारि कृपाना अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना
Verse 2
डारह परसु परिघ पाषाना लागेउ बृष्टि करै बहु बाना
Verse 3
दस दिसि रहे बान नभ छाई मानहुँ मघा मेघ झरि लाई
Verse 4
धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना जो मारइ तेहि कोउ न जाना
Verse 5
गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं
Verse 6
अवघट घाट बाट गिरि कंदर माया बल कीन्हेसि सर पंजर
Verse 7
जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर सुरपति बंदि परे जनु मंदर
Verse 8
मारुतसुत अंगद नल नीला कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला
Verse 9
पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन
Verse 10
पुनि रघुपति सैं जूझे लागा सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा
Verse 11
ब्याल पास बस भए खरारी स्वबस अनंत एक अबिकारी
Verse 12
नट इव कपट चरित कर नाना सदा स्वतंत्र एक भगवाना
Verse 13
रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो नागपास देवन्ह भय पायो
Verse 14
गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास
Verse 15
सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास
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