Book 6 • Chapter 72
Section 72
13 verses
Verse 1
दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी समर भई सुभटन्ह श्रम घनी
Verse 2
राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा
Verse 3
छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती
Verse 4
बहु बिलाप दसकंधर करई बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई
Verse 5
रोवहिं नारि हृदय हति पानी तासु तेज बल बिपुल बखानी
Verse 6
मेघनाद तेहि अवसर आयउ कहि बहु कथा पिता समुझायउ
Verse 7
देखेहु कालि मोरि मनुसाई अबहिं बहुत का करौं बड़ाई
Verse 8
इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ सो बल तात न तोहि देखायउँ
Verse 9
एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना चहुँ दुआर लागे कपि नाना
Verse 10
इत कपि भालु काल सम बीरा उत रजनीचर अति रनधीरा
Verse 11
लरहिं सुभट निज निज जय हेतू बरनि न जाइ समर खगकेतू
Verse 12
मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास
Verse 13
गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास
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