Book 6 • Chapter 78
Section 78
9 verses
Verse 1
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन आपुन मंद कथा सुभ पावन
Verse 2
पर उपदेस कुसल बहुतेरे जे आचरहिं ते नर न घनेरे
Verse 3
निसा सिरानि भयउ भिनुसारा लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा
Verse 4
सुभट बोलाइ दसानन बोला रन सन्मुख जा कर मन डोला
Verse 5
सो अबहीं बरु जाउ पराई संजुग बिमुख भएँ न भलाई
Verse 6
निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा
Verse 7
अस कहि मरुत बेग रथ साजा बाजे सकल जुझाऊ बाजा
Verse 8
चले बीर सब अतुलित बली जनु कज्जल कै आँधी चली
Verse 9
असगुन अमित होहिं तेहि काला गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला
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