Book 6 • Chapter 79
Section 79
13 verses
Verse 1
चलेउ निसाचर कटकु अपारा चतुरंगिनी अनी बहु धारा
Verse 2
बिबिध भाँति बाहन रथ जाना बिपुल बरन पताक ध्वज नाना
Verse 3
चले मत्त गज जूथ घनेरे प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे
Verse 4
बरन बरद बिरदैत निकाया समर सूर जानहिं बहु माया
Verse 5
अति बिचित्र बाहिनी बिराजी बीर बसंत सेन जनु साजी
Verse 6
चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं
Verse 7
उठी रेनु रबि गयउ छपाई मरुत थकित बसुधा अकुलाई
Verse 8
पनव निसान घोर रव बाजहिं प्रलय समय के घन जनु गाजहिं
Verse 9
भेरि नफीरि बाज सहनाई मारू राग सुभट सुखदाई
Verse 10
केहरि नाद बीर सब करहीं निज निज बल पौरुष उच्चरहीं
Verse 11
कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा
Verse 12
हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई
Verse 13
यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई धाए करि रघुबीर दोहाई
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