Book 6 • Chapter 80
Section 80
17 verses
Verse 1
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा देखि बिभीषन भयउ अधीरा
Verse 2
अधिक प्रीति मन भा संदेहा बंदि चरन कह सहित सनेहा
Verse 3
नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना केहि बिधि जितब बीर बलवाना
Verse 4
सुनहु सखा कह कृपानिधाना जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना
Verse 5
सौरज धीरज तेहि रथ चाका सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका
Verse 6
बल बिबेक दम परहित घोरे छमा कृपा समता रजु जोरे
Verse 7
ईस भजनु सारथी सुजाना बिरति चर्म संतोष कृपाना
Verse 8
दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा बर बिग्यान कठिन कोदंडा
Verse 9
अमल अचल मन त्रोन समाना सम जम नियम सिलीमुख नाना
Verse 10
कवच अभेद बिप्र गुर पूजा एहि सम बिजय उपाय न दूजा
Verse 11
सखा धर्ममय अस रथ जाकें जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें
Verse 12
महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर
Verse 13
जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर 80(क)
Verse 14
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज
Verse 15
एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज 80(ख)
Verse 16
उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान
Verse 17
लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन 80(ग)
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