Book 6 • Chapter 82
Section 82
8 verses
Verse 1
धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर सन्मुख चले हूह दै बंदर
Verse 2
गहि कर पादप उपल पहारा डारेन्हि ता पर एकहिं बारा
Verse 3
लागहिं सैल बज्र तन तासू खंड खंड होइ फूटहिं आसू
Verse 4
चला न अचल रहा रथ रोपी रन दुर्मद रावन अति कोपी
Verse 5
इत उत झपटि दपटि कपि जोधा मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा
Verse 6
चले पराइ भालु कपि नाना त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना
Verse 7
पाहि पाहि रघुबीर गोसाई यह खल खाइ काल की नाई
Verse 8
तेहि देखे कपि सकल पराने दसहुँ चाप सायक संधाने
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