Book 6 • Chapter 86
Section 86
10 verses
Verse 1
चलत होहिं अति असुभ भयंकर बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर
Verse 2
भयउ कालबस काहु न माना कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना
Verse 3
चली तमीचर अनी अपारा बहु गज रथ पदाति असवारा
Verse 4
प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें सलभ समूह अनल कहँ जैंसें
Verse 5
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही
Verse 6
अब जनि राम खेलावहु एही अतिसय दुखित होति बैदेही
Verse 7
देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना उठि रघुबीर सुधारे बाना
Verse 8
जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे
Verse 9
अरुन नयन बारिद तनु स्यामा अखिल लोक लोचनाभिरामा
Verse 10
कटितट परिकर कस्यो निषंगा कर कोदंड कठिन सारंगा
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