Book 6 • Chapter 92
Section 92
14 verses
Verse 1
चले बान सपच्छ जनु उरगा प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा
Verse 2
रथ बिभंजि हति केतु पताका गर्जा अति अंतर बल थाका
Verse 3
तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना
Verse 4
बिफल होहिं सब उद्यम ताके जिमि परद्रोह निरत मनसा के
Verse 5
तब रावन दस सूल चलावा बाजि चारि महि मारि गिरावा
Verse 6
तुरग उठाइ कोपि रघुनायक खैंचि सरासन छाँड़े सायक
Verse 7
रावन सिर सरोज बनचारी चलि रघुबीर सिलीमुख धारी
Verse 8
दस दस बान भाल दस मारे निसरि गए चले रुधिर पनारे
Verse 9
स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना
Verse 10
तीस तीर रघुबीर पबारे भुजन्हि समेत सीस महि पारे
Verse 11
काटतहीं पुनि भए नबीने राम बहोरि भुजा सिर छीने
Verse 12
प्रभु बहु बार बाहु सिर हए कटत झटिति पुनि नूतन भए
Verse 13
पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा अति कौतुकी कोसलाधीसा
Verse 14
रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू मानहुँ अमित केतु अरु राहू
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