Book 6 • Chapter 91
Section 91
8 verses
Verse 1
कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर कुलिस समान लाग छाँड़ै सर
Verse 2
नानाकार सिलीमुख धाए दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए
Verse 3
पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा छन महुँ जरे निसाचर तीरा
Verse 4
छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई बान संग प्रभु फेरि चलाई
Verse 5
कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै
Verse 6
निफल होहिं रावन सर कैसें खल के सकल मनोरथ जैसें
Verse 7
तब सत बान सारथी मारेसि परेउ भूमि जय राम पुकारेसि
Verse 8
राम कृपा करि सूत उठावा तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा
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