Book 6 • Chapter 94
Section 94
8 verses
Verse 1
आवत देखि सक्ति अति घोरा प्रनतारति भंजन पन मोरा
Verse 2
तुरत बिभीषन पाछें मेला सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला
Verse 3
लागि सक्ति मुरुछा कछु भई प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई
Verse 4
देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो
Verse 5
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे
Verse 6
सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए एक एक के कोटिन्ह पाए
Verse 7
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो अब तव कालु सीस पर नाच्यो
Verse 8
राम बिमुख सठ चहसि संपदा अस कहि हनेसि माझ उर गदा
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