Book 6 • Chapter 99
Section 99
13 verses
Verse 1
तेही निसि सीता पहिं जाई त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई
Verse 2
सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी सीता उर भइ त्रास घनेरी
Verse 3
मुख मलीन उपजी मन चिंता त्रिजटा सन बोली तब सीता
Verse 4
होइहि कहा कहसि किन माता केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता
Verse 5
रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई बिधि बिपरीत चरित सब करई
Verse 6
मोर अभाग्य जिआवत ओही जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही
Verse 7
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा
Verse 8
जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए
Verse 9
रघुपति बिरह सबिष सर भारी तकि तकि मार बार बहु मारी
Verse 10
ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना सोइ बिधि ताहि जिआव न आना
Verse 11
बहु बिधि कर बिलाप जानकी करि करि सुरति कृपानिधान की
Verse 12
कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी उर सर लागत मरइ सुरारी
Verse 13
प्रभु ताते उर हतइ न तेही एहि के हृदयँ बसति बैदेही
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