Book 5 • Chapter 23
Section 23
10 verses
Verse 1
राम चरन पंकज उर धरहू लंका अचल राज तुम्ह करहू
Verse 2
रिषि पुलिस्त जसु बिमल मंयका तेहि ससि महुँ जनि होहु कलंका
Verse 3
राम नाम बिनु गिरा न सोहा देखु बिचारि त्यागि मद मोहा
Verse 4
बसन हीन नहिं सोह सुरारी सब भूषण भूषित बर नारी
Verse 5
राम बिमुख संपति प्रभुताई जाइ रही पाई बिनु पाई
Verse 6
सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं बरषि गए पुनि तबहिं सुखाहीं
Verse 7
सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी बिमुख राम त्राता नहिं कोपी
Verse 8
संकर सहस बिष्नु अज तोही सकहिं न राखि राम कर द्रोही
Verse 9
मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम अभिमान
Verse 10
भजहु राम रघुनायक कृपा सिंधु भगवान
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