Book 5 • Chapter 29
Section 29
10 verses
Verse 1
जौं न होति सीता सुधि पाई मधुबन के फल सकहिं कि खाई
Verse 2
एहि बिधि मन बिचार कर राजा आइ गए कपि सहित समाजा
Verse 3
आइ सबन्हि नावा पद सीसा मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा
Verse 4
पूँछी कुसल कुसल पद देखी राम कृपाँ भा काजु बिसेषी
Verse 5
नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना राखे सकल कपिन्ह के प्राना
Verse 6
सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ
Verse 7
राम कपिन्ह जब आवत देखा किएँ काजु मन हरष बिसेषा
Verse 8
फटिक सिला बैठे द्वौ भाई परे सकल कपि चरनन्हि जाई
Verse 9
प्रीति सहित सब भेटे रघुपति करुना पुंज
Verse 10
पूँछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज
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