Book 5 • Chapter 28
Section 28
10 verses
Verse 1
चलत महाधुनि गर्जेसि भारी गर्भ स्त्रवहिं सुनि निसिचर नारी
Verse 2
नाघि सिंधु एहि पारहि आवा सबद किलकिला कपिन्ह सुनावा
Verse 3
हरषे सब बिलोकि हनुमाना नूतन जन्म कपिन्ह तब जाना
Verse 4
मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा कीन्हेसि रामचन्द्र कर काजा
Verse 5
मिले सकल अति भए सुखारी तलफत मीन पाव जिमि बारी
Verse 6
चले हरषि रघुनायक पासा पूँछत कहत नवल इतिहासा
Verse 7
तब मधुबन भीतर सब आए अंगद संमत मधु फल खाए
Verse 8
रखवारे जब बरजन लागे मुष्टि प्रहार हनत सब भागे
Verse 9
जाइ पुकारे ते सब बन उजार जुबराज
Verse 10
सुनि सुग्रीव हरष कपि करि आए प्रभु काज
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