Book 5 • Chapter 27
Section 27
10 verses
Verse 1
मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा
Verse 2
चूड़ामनि उतारि तब दयऊ हरष समेत पवनसुत लयऊ
Verse 3
कहेहु तात अस मोर प्रनामा सब प्रकार प्रभु पूरनकामा
Verse 4
दीन दयाल बिरिदु संभारी हरहु नाथ मम संकट भारी
Verse 5
तात सक्रसुत कथा सुनाएहु बान प्रताप प्रभुहि समुझाएहु
Verse 6
मास दिवस महुँ नाथु न आवा तौ पुनि मोहि जिअत नहिं पावा
Verse 7
कहु कपि केहि बिधि राखौं प्राना तुम्हहू तात कहत अब जाना
Verse 8
तोहि देखि सीतलि भइ छाती पुनि मो कहुँ सोइ दिनु सो राती
Verse 9
जनकसुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह
Verse 10
चरन कमल सिरु नाइ कपि गवनु राम पहिं कीन्ह
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