Book 5 • Chapter 38
Section 38
10 verses
Verse 1
सोइ रावन कहुँ बनि सहाई अस्तुति करहिं सुनाइ सुनाई
Verse 2
अवसर जानि बिभीषनु आवा भ्राता चरन सीसु तेहिं नावा
Verse 3
पुनि सिरु नाइ बैठ निज आसन बोला बचन पाइ अनुसासन
Verse 4
जौ कृपाल पूँछिहु मोहि बाता मति अनुरुप कहउँ हित ताता
Verse 5
जो आपन चाहै कल्याना सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना
Verse 6
सो परनारि लिलार गोसाईं तजउ चउथि के चंद कि नाई
Verse 7
चौदह भुवन एक पति होई भूतद्रोह तिष्टइ नहिं सोई
Verse 8
गुन सागर नागर नर जोऊ अलप लोभ भल कहइ न कोऊ
Verse 9
काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ
Verse 10
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत
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