Book 5 • Chapter 39
Section 39
12 verses
Verse 1
तात राम नहिं नर भूपाला भुवनेस्वर कालहु कर काला
Verse 2
ब्रह्म अनामय अज भगवंता ब्यापक अजित अनादि अनंता
Verse 3
गो द्विज धेनु देव हितकारी कृपासिंधु मानुष तनुधारी
Verse 4
जन रंजन भंजन खल ब्राता बेद धर्म रच्छक सुनु भ्राता
Verse 5
ताहि बयरु तजि नाइअ माथा प्रनतारति भंजन रघुनाथा
Verse 6
देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही भजहु राम बिनु हेतु सनेही
Verse 7
सरन गएँ प्रभु ताहु न त्यागा बिस्व द्रोह कृत अघ जेहि लागा
Verse 8
जासु नाम त्रय ताप नसावन सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन
Verse 9
बार बार पद लागउँ बिनय करउँ दससीस
Verse 10
परिहरि मान मोह मद भजहु कोसलाधीस 39(क)
Verse 11
मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि पठई यह बात
Verse 12
तुरत सो मैं प्रभु सन कही पाइ सुअवसरु तात 39(ख)
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