Book 5 • Chapter 54
Section 54
10 verses
Verse 1
नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें मानहु कहा क्रोध तजि तैसें
Verse 2
मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा जातहिं राम तिलक तेहि सारा
Verse 3
रावन दूत हमहि सुनि काना कपिन्ह बाँधि दीन्हे दुख नाना
Verse 4
श्रवन नासिका काटै लागे राम सपथ दीन्हे हम त्यागे
Verse 5
पूँछिहु नाथ राम कटकाई बदन कोटि सत बरनि न जाई
Verse 6
नाना बरन भालु कपि धारी बिकटानन बिसाल भयकारी
Verse 7
जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा सकल कपिन्ह महँ तेहि बलु थोरा
Verse 8
अमित नाम भट कठिन कराला अमित नाग बल बिपुल बिसाला
Verse 9
द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि
Verse 10
दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासि
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