Book 5 • Chapter 55
Section 55
10 verses
Verse 1
ए कपि सब सुग्रीव समाना इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना
Verse 2
राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीं तृन समान त्रेलोकहि गनहीं
Verse 3
अस मैं सुना श्रवन दसकंधर पदुम अठारह जूथप बंदर
Verse 4
नाथ कटक महँ सो कपि नाहीं जो न तुम्हहि जीतै रन माहीं
Verse 5
परम क्रोध मीजहिं सब हाथा आयसु पै न देहिं रघुनाथा
Verse 6
सोषहिं सिंधु सहित झष ब्याला पूरहीं न त भरि कुधर बिसाला
Verse 7
मर्दि गर्द मिलवहिं दससीसा ऐसेइ बचन कहहिं सब कीसा
Verse 8
गर्जहिं तर्जहिं सहज असंका मानहु ग्रसन चहत हहिं लंका
Verse 9
-सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम
Verse 10
रावन काल कोटि कहु जीति सकहिं संग्राम
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