Book 7 • Chapter 1
Section 1
8 verses
Verse 1
रहेउ एक दिन अवधि अधारा समुझत मन दुख भयउ अपारा
Verse 2
कारन कवन नाथ नहिं आयउ जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ
Verse 3
अहह धन्य लछिमन बड़भागी राम पदारबिंदु अनुरागी
Verse 4
कपटी कुटिल मोहि प्रभु चीन्हा ताते नाथ संग नहिं लीन्हा
Verse 5
जौं करनी समुझै प्रभु मोरी नहिं निस्तार कलप सत कोरी
Verse 6
जन अवगुन प्रभु मान न काऊ दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ
Verse 7
मोरि जियँ भरोस दृढ़ सोई मिलिहहिं राम सगुन सुभ होई
Verse 8
बीतें अवधि रहहि जौं प्राना अधम कवन जग मोहि समाना
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