Book 7 • Chapter 124
Section 124
8 verses
Verse 1
सुमिरि राम के गुन गन नाना पुनि पुनि हरष भुसुंडि सुजाना
Verse 2
महिमा निगम नेति करि गाई अतुलित बल प्रताप प्रभुताई
Verse 3
सिव अज पूज्य चरन रघुराई मो पर कृपा परम मृदुलाई
Verse 4
अस सुभाउ कहुँ सुनउँ न देखउँ केहि खगेस रघुपति सम लेखउँ
Verse 5
साधक सिद्ध बिमुक्त उदासी कबि कोबिद कृतग्य संन्यासी
Verse 6
जोगी सूर सुतापस ग्यानी धर्म निरत पंडित बिग्यानी
Verse 7
तरहिं न बिनु सेएँ मम स्वामी राम नमामि नमामि नमामी
Verse 8
सरन गएँ मो से अघ रासी होहिं सुद्ध नमामि अबिनासी
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