Book 7 • Chapter 22
Section 22
8 verses
Verse 1
भूमि सप्त सागर मेखला एक भूप रघुपति कोसला
Verse 2
भुअन अनेक रोम प्रति जासू यह प्रभुता कछु बहुत न तासू
Verse 3
सो महिमा समुझत प्रभु केरी यह बरनत हीनता घनेरी
Verse 4
सोउ महिमा खगेस जिन्ह जानी फिरी एहिं चरित तिन्हहुँ रति मानी
Verse 5
सोउ जाने कर फल यह लीला कहहिं महा मुनिबर दमसीला
Verse 6
राम राज कर सुख संपदा बरनि न सकइ फनीस सारदा
Verse 7
सब उदार सब पर उपकारी बिप्र चरन सेवक नर नारी
Verse 8
एकनारि ब्रत रत सब झारी ते मन बच क्रम पति हितकारी
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