Book 7 • Chapter 3
Section 3
10 verses
Verse 1
हरषि भरत कोसलपुर आए समाचार सब गुरहि सुनाए
Verse 2
पुनि मंदिर महँ बात जनाई आवत नगर कुसल रघुराई
Verse 3
सुनत सकल जननीं उठि धाईं कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई
Verse 4
समाचार पुरबासिन्ह पाए नर अरु नारि हरषि सब धाए
Verse 5
दधि दुर्बा रोचन फल फूला नव तुलसी दल मंगल मूला
Verse 6
भरि भरि हेम थार भामिनी गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी
Verse 7
जे जैसेहिं तैसेहिं उटि धावहिं बाल बृद्ध कहँ संग न लावहिं
Verse 8
एक एकन्ह कहँ बूझहिं भाई तुम्ह देखे दयाल रघुराई
Verse 9
अवधपुरी प्रभु आवत जानी भई सकल सोभा कै खानी
Verse 10
बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा भइ सरजू अति निर्मल नीरा
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